✍ संजय मिश्रा
भोपाल। एक तरफ जीविका का संकट तो, वहीं दूसरी तरफ आजीविका का संकट ! एक तरफ जहाँ पूरा देश बेरोजगारी की महामारी से जूझ रहा था वहीँ अब दूसरी तरफ कोरोना की महामारी के चलते पूरा देश अस्त व्यस्त हो गया है !
मध्यप्रदेश को "एजुकेशन-हब" कहा जाता है, मध्यप्रदेश के विभिन्न महानगरों एवं शहरों में प्रदेश सहित देश के अन्य राज्यों से युवा शिक्षा प्राप्त करने के लिए आते हैं।
कोरोना महामारी के कारण ही वर्तमान में पूरा देश बंद है, देश बंद होने का मतलब पूरा "रोजगार" बंद है ऐसे में उनकी मासिक आमदनी के सारे स्रोत ठप हुए पड़े हैं !
प्रदेश के कोने-कोने से, गाँव और कस्बों से शहरों में शिक्षा प्राप्त करने के लिए आये हुए छात्र किसानों के बेटे हैं, मजदूरों के बेटे हैं, ऑटो चलाने वालों के बेटे हैं। चूँकि देश मे सारे रोजगार के साधन बंद पड़े हुए हैं, इसलिए इनके पास भी कोई आमदनी के स्रोत नही बचे।
ऐसे विद्यार्थी जो इस महामारी के चलते अपने घर और गाँव से सैकड़ों किलोमीटर दूर शहरों में फंसे हुए हैं, इस समय उनके लिए खाने की चीजें एकत्रित करना दूभर हो गया है, ऐसे में उनके लिए मकान का किराया देना कैसे संभव हो पायेगा, इनके परिजनों की तरफ से भी यह संभव नही है, क्योंकि उनके भी सारे आय के स्रोत बंद हो चुके हैं।
विद्यार्थियों की इस समस्या को ध्यान रखते हुए महाराष्ट्र औऱ दिल्ली की सरकार ने महत्वपूर्ण कदम उठाकर किराया वहन करने का निर्णय लिया है।
अंततः युवाज़ संस्था ने मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को पत्र लिख कर ध्यान आकर्षित करते हुए भी आग्रह है,किया है कि विद्यार्थीयों की समस्या को ध्यान रखकर निराकरण करते हुए 3 महीने के मकान किरायामाफी की ओर विशेष कदम उठाएं।